
यह ओशो की सबसे विशाल, गहरी और ध्यानपूर्ण श्रृंखलाओं में से एक मानी जाती है। इसमें कुल 127 हिंदी प्रवचन हैं, जो लाओत्सु के अमर ग्रंथ Tao Te Ching पर आधारित हैं। यह प्रवचन 1971 से 1975 के बीच दिए गए थे।
ओशो इस श्रृंखला में बार-बार कहते हैं कि जीवन संघर्ष से नहीं, बल्कि अस्तित्व के साथ बहने से खिलता है। “ताओ” का अर्थ है — मार्ग, लेकिन ऐसा मार्ग जिस पर चलकर कोई मंज़िल नहीं पाई जाती, बल्कि स्वयं जीवन ही मंज़िल बन जाता है।
EpisodeDurationमुख्य विषय
Tao Upanishad 01
1h 25m 26s
सनातन व अविकारी ताओ
Tao Upanishad 02
1h 39m 27s
रहस्यमय परम स्रोत
Tao Upanishad 03
1h 29m 26s
निष्काम गहराइयाँ
Tao Upanishad 04
1h 31m 11s
ज्ञान और अज्ञान के पार
Tao Upanishad 05
1h 24m 13s
विरोधों से मुक्ति
Tao Upanishad 06
1h 50m 01s
विपरीत स्वरों का संगीत
Tao Upanishad 07
1h 36m 28s
निष्क्रिय कर्म और मौन
Tao Upanishad 08
1h 29m 17s
श्रेय और स्वामित्व से मुक्ति
Tao Upanishad 09
1h 54m 27s
महत्वाकांक्षा का विष
Tao Upanishad 10
1h 04m 01s
खाली मन और सहजता
EpisodeApprox Theme
Tao Upanishad 123
साक्षीभाव की अंतिम परिपक्वता
Tao Upanishad 124
अहंकार का विसर्जन
Tao Upanishad 125
शून्यता में विश्राम
Tao Upanishad 126
ताओ के साथ पूर्ण एकत्व
Tao Upanishad 127
अंतिम मौन और सहज समाधि
इन अंतिम प्रवचनों में ओशो “doing” से “being” की यात्रा को पूर्ण करते हैं। यहां वे बताते हैं कि आध्यात्मिकता किसी उपलब्धि का नाम नहीं, बल्कि पूर्ण विश्राम और सहजता की स्थिति है।
ओशो बार-बार कहते हैं कि जीवन नदी की तरह है। जो उसके विरुद्ध तैरता है वह दुख पाता है, जो बहना सीख जाता है वही ताओ को जानता है।
लाओत्सु के “जल” के प्रतीक को ओशो ने बेहद सुंदर तरीके से समझाया है —
जल सबसे नरम है, फिर भी सबसे शक्तिशाली।
यह श्रृंखला achievement-based spirituality को तोड़ती है।
यहां ध्यान “कुछ बनने” के लिए नहीं बल्कि “जो हैं उसे देखने” के लिए है।
श्रृंखला धीरे-धीरे listener को witnessing state की ओर ले जाती है।
कई listeners इसे “meditative hypnosis” जैसा अनुभव बताते हैं।